Category - मीराबाई भजन

मीराबाई भजन

को विरहिणी को दुःख जाणै हो

को विरहिणी को दुःख जाणै (ko verhini ko Dhukh jane ho bhajan in Mp3) PlayStop X को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।। मीराँ के पति आप रमैया, दूजा नहिं कोई छाणै हो रोगी अन्तर वैद बसत है, वैद ही ओखद जाणै हो। सब जग कूडो कंटक दुनिया, दरध न कोई पिछाणै हो को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।। जा घट बिरहा सोई लखी है, कै कोई हरि जन मानै हो। विरह कद उरि अन्दर माँहि, हरि बिन सुख कानै हो। को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।। मीराँ के पति आप रमैया, दूजा नहिं कोई......

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किणु संग खेलूं होली, पिया तज गए हैं अकेली

किणु संग खेलूं होली, पिया तज गए हैं अकेली (Kinu Sang Khelun Holi Piya Taj Gaye Hai Akeli bhajan in hindi Mp3) PlayStop X माणिक मोती सब हम छोड़े, गल में पहनी सेली भोजन भवन बलो नहीं लागे, पिया कारण भई रे अकेली, मुझे दूरी क्यों मेलि, पिया तज गए हैं अकेली किणु संग खेलूं होली… अब तुम प्रीत अवरसो जोड़ी, हम से करी क्यों पहेली बहु दिन बीते अजहू आ आये, लगा रही ताला बेली कीनू दिलमा ये हेली, पिया तज गए हैं अकेली किणु संग खेलूं होली… श्याम बिना......

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जो तुम तोड़ो पिया, मैं नाही तोडू रे

जो तुम तोड़ो पिया, मैं नाही तोडू रे (Jo Tum Todo Piya Main Nahi Todu Re bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xजो तुम तोड़ो पिया, मैं नाही तोडू रे। तोरी प्रीत तोड़ी कृष्णा, कौन संग जोडू॥ तुम भये तरुवर, मैं भयी पंखिया। तुम भये सरोवर, मैं भयी मछिया॥तुम भये गिरिवर, मैं भयी चारा। तुम भये चंदा मैं भयी चकोरा॥ तुम भये मोती प्रभु जी, हम भये धागा। तुम भये सोना, हम भये सुहागा॥ बाई मीरा के प्रभु बृज के बासी। तुम मेरे ठाकुर, मई तेरी दासी॥

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ओ जी हरी कित गए नेहा लगाए

ओ जी हरी कित गए नेहा लगाए (Ho Ji Hari Kit Gaye Neha Lagaye bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xओ जी हरी कित गए नेहा लगाए नेहा लगाए मन हर लियो रास भरी टेर सुनाये मेरे मन में ऐसी आवे मरुँ जहर विष खाये के छड़ी गए विश्वासगाथ करि गएँ नेह की रेल चढ़ाये मीरा के प्रभु कब्रे मिलोगे रहे मधुपुरी छाये के

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बरसै बुंदिया सावन की

बरसै बुंदिया सावन की (Barse Boondiyan Sawan Ki bhajan in hindi mp3) PlayStop Xबरसै बुंदिया सावन की सावन की मनभावन की। सावन में उमग्यो मेरो मनवा भनक सुनी हरि आवन की। उमड़ घुमड़ चहुं दिसि से आयोदामण दमके झर लावन की। नन्हीं नन्हीं बूंदन मेहा बरसै सीतल पवन सोहावन की। मीराके प्रभु गिरधर नागर आनंद मंगल गावन की। 

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मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई (Mere tho giridhar gopal doosro na koi bhajan in hindi Mp3) PlayStop X मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥ जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई। तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥ छांडि द कुलकी कानि कहा करिहै कोई। संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई॥ चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई। मोती मूंगे उतार बनमाला पोई॥ अंसुवन जल सीचि सीचि प्रेम बेलि बोई। अब तो बेल फैल ग आंणद फल होई॥ दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई। माखन जब काढ़ि लियो......

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बाला मैं बैरागण हूंगी

बाला मैं बैरागण हूंगी (Bala me Bairagan hoongi bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xबाला मैं बैरागण हूंगी। जिन भेषां म्हारो साहिब रीझे सोही भेष धरूंगी। सील संतोष धरूं घट भीतर समता पकड़ रहूंगी। जाको नाम निरंजन कहिये ताको ध्यान धरूंगी।गुरुके ग्यान रंगू तन कपड़ा मन मुद्रा पैरूंगी। प्रेम पीतसूं हरिगुण गाऊं चरणन लिपट रहूंगी। या तन की मैं करूं कीगरी रसना नाम कहूंगी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर साधां संग रहूंगी।

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हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय ( Hey ri Main to Prem Diwani Mero Dard na jane koe bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xहे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय। घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय। जौहरि की गति जौहरी जाणै की जिन जौहर होय। सूली ऊपर सेज हमारी सोवण किस बिध होय।गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय। दरद की मारी बन-बन डोलूं बैद मिल्या नहिं कोय। मीरा की प्रभु पीर मिटेगी जद बैद सांवरिया होय।

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कैसे जिऊँ री माई, हरि बिन कैसे जिऊँ री

कैसे जिऊँ री माई, हरि बिन कैसे जिऊँ री ( Kaise Jiyu ri mae, hari bin kaise jiyu ri bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xकैसे जिऊँ री माई, हरि बिन कैसे जिऊँ री ।।टेक।। उदक दादुर पीनवत है, जल से ही उपजाई। पल एक जल कूँ मीन बिसरे, तलफत मर जाई। पिया बिन पीली भई रे, ज्यों काठ घुन खाय।औषध मूल न संचरै, रे बाला बैद फिरि जाय। उदासी होय बन बन फिरूँ, रे बिथा तन छाई। दासी मीराँ लाल गिरधर, मिल्या है सुखदाई।। (उदक=पानी, मीन=मछली, तलफत=तड़प कर, बाला=वल्लभ,प्रियतम)

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सैया में गिरिधर के रंग राती

सैया में गिरिधर के रंग राती (Soya me Girdhar Ke Rang Rati bhajan in hindi Mp3) PlayStop Xसैया में गिरिधर के रंग राती सैया में गिरिधर के रंग राती पहर सखी मैं, झिरमिट रमवा जाती झिरमिट में मोहि मोहन मिलिग्यो, आनँद मंगल गातीकोई के पिया परदेस बसत हैं, लिख-लिख भेजें पाती म्हारे पिया म्हारे हिय में बसत हैं, ना कहुँ आती जाती प्रेम भट्ठी को मैं मद पीयो, छकी फिरूँ दिन राती ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि चरणाँ चित लाती 

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