प्रसिद्ध हिंदी भजन

इतना तो करना स्वामी

ganga-puja

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,

गोविन्द नाम लेकर फ़िर प्राण तन से निकले।

श्री गंगा जी का तट हो यमुना का वंशी वट हो,

मेरा साँवरा निकट हो जब प्राण तन से निकले।

श्री वृन्दावन का स्थल हो मेरे मुख में तुलसी दल हो,

विष्णुचरण का जल हो जब प्राण तन से निकले।

जब कण्ठ प्राण आवे कोई रोग न सतावे,

यम दर्श न दिखावे जब प्राण तन से निकले।

सुधि भी न हो तन की तैयारी हो गमन की,

लकड़ी हो ब्रज के वन की जब प्राण तन से निकले।

ये नेक सी अरज है मानो तो क्या हरज है,

कुछ आपका भी फर्ज है जब प्राण तन से निकले।

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले।

(गोधन , गजधन ,रतनधन , कंचन खान सुखान |

जब आवे संतोषधन , सब धन धुमि सामान | |)

 

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