आयुर्वेद उपचार

विषैले दंश की आयुर्वेदिक चिकित्सा

byteविषैले दंश के शिकार होने का खतरा अलग देशों में अलग प्रकार का होता है। विषैले दंश के ज़िम्मेदार अनेक जानवर और जीव जंतु होते हैं, जैसे कि सांप, बिच्छू, मकड़ी, और जैलिफिश जैसे समुद्री जानवर। अगर आप विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप उस देश के ज़हरीले जानवरों और जीव जंतुओं के बारे में अच्छी तरह जान लें; खासकर के अगर आप उस देश में किसी शिविर  में रहने की, या पैदल लंबी यात्रा करने की, या तैरने की योजना बना रहे हैं। और उस देश के विषैले जानवरों और जीव जंतुओं के दंश से बचने की सावधानियों के बारे में जानना भी आपके हित में होगा।

विषैले दंश के लक्षण :

1. अगर आपको किसी सांप ने काटा है और अगर ज़ख्म में विष मौजूद है तो कुछ ही घंटों में दंश के लक्षण नज़र आने लगेंगे। प्रारंभिक लक्षण दंश के आसपास ही नज़र आयेंगे, जो इस प्रकार होंगे:

2. सूजन और त्वचा का रंग फीका पड़ना।

3. पीड़ा और जलन का एहसास।

उसके बाद व्यापक रूप में लक्षण नज़र आयेंगे जैसे कि:

4. फीकी त्वचा और पसीना।

5. घबराहट।

6. बेहोश हो जाना।

7. रक्तचाप ऊपर जा सकता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर विपरीत असर पड़ सकता है,जिससे दिल का दौरा भी पड़ सकता है।

दंश के प्रकार :

1. बिच्छू का डंक,

2. विषैली मकड़ी का दंश एवं

3. समुद्री जंतुओं के विषैले दंश।

विषैले दंश के आयुर्वेदिक :

नींबू के रस में नमक मिलाकर उस घोल को दंश की हुई जगह पर मलने से विष का असर कम हो जाता है।

प्याज के रस को शहद के साथ मिलाकर दंश की हुई जगह पर मलने से भी विष का असर कम हो जाता है।

लहसून की लेई दंश वाली जगह पर लगाने से भी विष का असर कम होता है।

पिसे हुए अनार के पत्तों का रस ग्रसित जगह पर लगाने से भी विष का असर कम होता है।

हिंग की लेई भी दंश वाली जगह पर लगाने से विष का असर काफी हद तक कम होता है।

विष का असर कम करने के लिए नीम के पत्तों का रस भी कारगर साबित होता है।

पुदीने का रस भी विष के असर को कम करने में मदद करता है।

कटी हुई जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धो लें। सूजन से बचने के लिए एंटी हिस्टामिन का प्रयोग करें। मकड़ी और बिच्छू वगैरह जब काटते हैं तो आपके शरीर में विष भर देते हैं।

सूजन से बचने के लिए आइस पैक या धोने के ठंडे कपडे को ग्रसित जगह पर रखे रहें, और नीचे तकिया रखकर ग्रसित जगह को थोडा ऊंचा करके रखें।

पीड़ा या बुखार को कम करने के लिए एसिटामिनोफिन लें, और उसके बाद ग्रसित जगह पर एंटी बायोटिक जेल लगायें।

दंश वाली जगह पर निरंतर ध्यान बनाये रखें। ग्रसित जगह पर अधिक लाली और सूजन पर भी नजर रखे रहें। अगर लाली बढ़ जाए और बुखार आये तो फ़ौरन विशेषज्ञ की सलाह लें।

नुस्खे और चेतावनी :

अंजान जगहों पर अत्यधिक सावधानियां बरतें। और यही बात पथरीली जगहों और चट्टानों पर चलने पर भी लागू होती है, क्योंकि इनपर चलने की आवाज़ से सोये हुए खतरनाक और विषैले प्राणी जाग जाते हैं।

अंजान जगहों पर सैर करते समय अपने साथ प्रथमोपचार किट ज़रूर रखें।

About the author

Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.

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