आयुर्वेद उपचार

आयुर्वेद से स्वाइन फ्लू चिकित्सा

swine-fluswin flu H1N1 virus के कारण होने वाला एक संक्रमणजन्य रोग है जो किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है. यह वायरस दूषित वातावरण, दूषित वायु एवं श्वास-प्रश्वास के माध्यम से संक्रमित होता है.

स्वाइन-फ्लू कोई नयी बीमारी नहीं है, बल्कि यह सामान्य प्रकार के फ्लू के लक्षणों के समान लक्षण वाला फ्लू (प्रतिश्याय) है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसका कारण एच-वन-एन-वन नामक विषाणुओं को माना गया है। प्रकृति में ऐसे असंख्य विषाणु वातावरण में मौजूद हैं, जिन्हें कभी नष्ट नहीं किया जा सकता, लेकिन उनसे बचाव किया जा सकता है। आयुर्वेद के आचार्यों ने हजारों वर्ष पहले इसका वर्णन कर दिया था। शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) जीवाणुओं से प्रकोपित होकर शरीर में रोग उत्पन्न करते हैं। जब तक त्रिदोष संतुलित अवस्था में होते हैं, तब तक जीवाणुओं की शक्ति कम होती है, लेकिन त्रिदोष का संतुलन बिगडऩे पर बीमारी की स्थिति निर्मित होती है। प्रकृति ने इन जीवाणुओं और विषाणुओं के बीच ही मनुष्य को स्वस्थ बने रहने के लिए उच्च प्रतिरोधक क्षमता प्रदान की है, लेकिन दूषित आहार और अनियमित जीवन शैली की वजह से मनुष्य की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है।

लगातार बुखार, खांसी, गले में खराश, निगलने में परेशानी, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान, भूख नहीं लगना, अरूचि, छींक आना, स्वाइन-फ्लू के लक्षण हो सकते हैं।आयुर्वेद के अनुसार स्वाइन-फ्लू वास्तव में वात-श्लैश्मिक ज्वर है। इससे बचे रहने के लिए शुद्ध और शाकाहारी भोजन करना

चाहिए, वात एवं कफ शामक, गर्म और स्निग्ध आहार अल्प मात्रा में लेना चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, खुली और साफ हवा में रहना चाहिए, यानी कमरे हवादार होने चाहिए और उनमें सूर्य की रौशनी पर्याप्त मात्रा में आनी चाहिए, उबालकर ठंडा किया हुआ पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए, सवेरे नियमित रूप से प्राणायाम करना चाहिए, फ्लू के रोगियों से दूर रहना चाहिए, यथासंभव भीड़ से बचना चाहिए, सुअर के बाड़े अथवा सुअरों से दूर रहना चाहिए, उल्टी, छींक, खांसी आदि शारीरिक वेगों को नहीं रोकना चाहिए।

स्वाइन फ्लू के लक्षण-

संक्रमण होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, ठण्ड लगना, कंपकपी, गले में खरास, छींक आना, नाक से लगातार पानी बहना, सांस लेने में कठिनाई, थकान इत्यादि हैं.

हर्बल चाय से करें स्वाइन फ्लू से बचाव :

स्वाइन-फ्लू की बीमारी से बचाव के लिए herbal tea बहुत लाभदायक हो सकती है। यह चाय आप अपने रसोई घर में भी आसानी बना सकते हैं। यह हर्बल चाय लौंग, इलायची, सोंठ, हल्दी, दालचीनी, गिलौय, तुलसी, कालीमिर्च और पिप्पली को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर तैयार की जा सकती है। इस चूर्ण की दो ग्राम मात्रा एक कप चाय में डालकर उसे अच्छी तरह उबालकर सुबह-शाम पीने पर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्वाइन-फ्लू जैसी बीमारी से भी बचाव होता है। सामान्य स्थिति में भी लोग इस हर्बल चाय का सेवन कर सकते हैं।

स्वाइन फ्लू को लेकर भ्रमित होने और घबराने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर मौसम में बदलाव के समय फ्लू अथवा सर्दी, जुकाम, बुखार की शिकायत होती रहती है, लेकिन सामान्य इलाज से ये शिकायतें दूर हो जाती हैं।कपूर और इलायची को पीसकर कपड़े में छोटी पोटली बनाकर रखें और उसे बार-बार सूंघते जाएं, तो स्वाइन-फ्लू सहित कई प्रकार के फ्लू यानी सर्दी, जुकाम, सिरदर्द, बुखार आदि से बचा जा सकता है। इसके अलावा चिरायता, गुडुची, अनंतमूल, सोंठ, हल्दी, कालमेघ, वासा और तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से भी इस बीमारी के इलाज में फायदा होता है। मरीज को नीलगिरी तेल का वाष्प लेना चाहिए। इसके साथ ही सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण, लक्ष्मी विलास रस, गोदंती, श्रंग-भस्म आदि का सेवन आवश्यकता अनुसार चिकित्सक के परामर्श से करना चाहिए।

घरेलू इलाज :

नीम की छाल – 100 ग्राम
गिलोय – 100 ग्राम
दालचीनी – 50 ग्राम
तुलसी पंचाग (तुलसी के बीज, पत्तियां, जड़, तना, फूल) – 50 ग्राम
लौंग – 25 ग्राम

उपरोक्त सभी चीजों को मिलाकर कूट ले और बारीक कर ले |

इस मिश्रण से ५ ग्राम लेकर ४०० ml पानी में मिलाकर आग में काढ़ा के तरह पकाये | जब १०० ml रह जाए तो ठंढा कर ले (गुनगुना रहे) और इस काढ़े को पिलाये | इसे दिन में दो – तीन बार पिलायें तो ३-४ दिनों में स्वाइन फ्लू ठीक हो जाएगा |

इसे वे लोग भी पी सकते है जिन्हे स्वाइन फ्लू नहीं है | इसके पीने से सामान्य लोगों को स्वाइन फ्लू नही होगा | यह दवा प्रतोरोध का काम करेगी |

आयुर्वेदिक इलाज

यह आयुर्वेदिक इलाज पतंजलि आयुर्वेद हरिद्वार के द्वारा दिया गया है | निम्न दवाये लेने से स्वाइन फ्लू ठीक हो जाएगा –

गिलोय घनवटी – 1 गोली
महासुदर्शन वटी  – 1 गोली
ज्वरनाशक वटी – 1 गोली
संजीवनी वटी – 1 गोली  (जिसे कफ और खांसी की अधिक शिकायत हो उनके लिए)

गिलोय घनवटी को खाली पेट ले और बाकी तीनों गोलियां खाने के ले | दिन में 2 -3 बार ले | इसको वे लोग भी ले जो स्वाइन फ्लू से बचना चाहतें है|

इसके साथ ही गलोय क्वाथ और ज्वरनाशक क्वाथ दोनों एक – एक चम्मच लेकर पानी में इसका काढ़ा बनाएँ | इसका सेवन दिन में दो बार करे |

इस आयुर्वेदिक दवा के इस्तेमाल से स्वाइन फ्लू ठीक हो जाएगा और यदि नहीं है तो होगा नही | यह प्रतिरोध का काम करेगा |

बचाव के उपाय/सावधानियां-

1. ayurveda के अनुसार इस ऋतु-सन्धि काल में श्वास, काश एवं कफ व्याधियों की सम्भावना ज्यादा रहती है, इसलिए इसी हिसाब से सावधानी बरतनी होगी.

2. उन व्यक्तियों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है जिन्हें बार-बार सर्दी जुकाम होता है.

3 .जिन्हें मौसमी एलर्जी, एलर्जिक अस्थमा या एलर्जिक रिनाइटिस की समस्या हो उन्हें विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है.

4. स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. पीड़ित व्यक्ति के प्रयोग में लाए जाने वाले वस्त्र तौलिया, रूमाल, बर्तन आदि को साफ रखें, उनका उपयोग अन्य लोग न करें. खांसते-छींकते समय मुंह ढके रखें, रूमाल का प्रयोग करें.

5. बचाव हेतु नियमित pranayama करें. सम्भव हो तो नियमित हवन (यज्ञ) भी करें.

6. गन्दगी, संक्रमणयुक्त स्थान एवं पीड़ित व्यक्तियों के घरों के आसपास हवन अवश्य करें. सार्वजनिक, सामूहिक रूप से हवन अवश्य करें.

7. कपूर, लौंग, गुड़ का बूरा, नीमपत्र, जावित्री, तिल, घी का हवन अत्यन्त लाभकारी.

8. तुलसी पत्र एवं आज्ञाघास (जरांकुश) उबालकर पिएं. दालचीनी चूर्ण शहद के साथ अथवा दालचीनी की चाय लाभदायक.

9. तुलसी पत्र, कालीमिर्च उबाल-छानकर पिएं. दिन भर सामान्य जल की जगह तुलसीयुक्त गुनगुने जल का सेवन करें.

10. हल्दी इस रोग में विशेष लाभकारी है. नियमित हल्दी युक्त दूध अथवा हल्दी, सेंधानमक, तुलसी पत्र पानी में उबालकर पीना भी फायदेमन्द है.

11. लेमन टी, प्रज्ञापेय (बिना दूध का) या ब्लैक टी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर पिएं.

12. तरल आहार का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें. ठण्डा, गरम एक साथ न लें, विरुद्ध आहार-विहार से बचें.

13. विटामिन सी से भरपूर आहार लाभदायक है. आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है.

14. आयुर्वेदिक औषधि ‘षडंग पानीय’ उबालकर पिएं. यह बाजार में तैयार भी मिलती है.

15. पसीना आने पर तुरन्त कपड़े न निकालें, न ही तुरन्त पंखे या ठण्डे जल का प्रयोग करें. नमकयुक्त गुनगुने जल से स्नान लाभदायक है.

16. दूषित जल व दूषित अन्न का प्रयोग न करें, बासी और गरिष्ठ भोजनों से बचें.

17. गिलोय, कालमेध, चिरायता, भुईं-आंवला, सरपुंखा, वासा इत्यादि जड़ी-बूटियां लाभदायक हैं.

18. हर रोज सुबह चरणामृत कहे जाने वाली तुलसी का प्रयोग सचमुच आपके लिए अमृत का काम कर सकती है। सुबह उठते ही आप पांच से दस पत्तियां अच्छी तरह तरह धो कर उनका सेवन कर लें। प्रतिदिन तुलसी के सेवन से गले और फेफड़ों की जहाँ सफाई होगी वही ये आपकी प्रतिरोधक क्षमता को इतनी मजबूती देगा कि आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के काबिल हो जायेगा।

19. गिलोय भी तुलसी की तरह आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में कारगर साबित हो सकती है। डेंगू फ्लू के इलाज में गिलोय अपनी क़ाबलियत पहले ही साबित कर चुका है इसलिए बिना संदेह आप स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए गिलोय का प्रयोग करें। गिलोय की ताकत बढ़ाने के लिए आप गिलोय की लंबी शाखा के साथ तुलसी की पत्तियाँ काली मिर्च,काला नमक, दालचीनी और मिश्री मिला सकते है। आप इन सभी पदर्थों को 15-20 मिनट तक उबाल कर एक काढ़ा बना ले और लगातार इनका प्रयोग करें।

20. कपूर का महत्व सिर्फ पूजा में ही नही है आप कपूर का प्रयोग इलाज के लिए भी कर सकते है आप कपूर को कपडे में लपेटकर अपने हाथ या गले में बांध कर हवा से होने वाले स्वाइन फ्लू के सक्रमण से बच सकते है। इसके अलावा आप कपूर का सेवन आलू और केले के साथ भी कर सकते है। कपूर के अधिक सेवन आपके स्वस्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है इसलिए हो सके तो कपूर का उपयोग खाने के लिए सिर्फ महीने में एक बार ही करें।

21. आमतौर पर लहसुन का प्रयोग हम अपने खाने में करते है। मोटापा कम करने के लिए कच्चा लहसुन बहुत सहायक होता है पर अगर आप स्वाइन फ्लू के खतरे को कम करना चाहते है तो सवेरे-सवेरे कच्चे लहसुन का सेवन कर सकते है ये आपकी प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि बाकि खाद्य पदार्थो की अपेक्षा ज्यादा करती है।

22. गाय का दूध के साथ हल्दी का प्रयोग करके हम स्वाइन फ्लू के प्राम्भिक लक्षणों को कम कर सकते है।

23. घृतकुमारी उर्फ़ एलोविरा का जेल जोड़ो के दर्द पर अद्भुत रूप से काम करने के साथ-साथ आपकी त्वचा में भी निखार लायेंगा।

24. होम्योपैथिक औषधियों में आप स्वाइन फ्लू के लिए पय्रोगेनियम 200 और इन्फलेन्ज़ियम 200 दिन में दो तीन बार ले सकते है ये औषधिया स्वाइन फ्लू के वायरस के साथ-साथ आम बुखार पर भी काम करती है।

25. योग से लगभग हर बीमारी का इलाज सम्भव है आप श्वास से फैलने वाले स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए प्राणायाम का चुनाव कर सकते है। नाक गले और फेफड़ों को फिट रखने के लिए आप नियमित रूप से प्राणायाम करे। प्राणायाम के साथ-साथ आप ताज़ी हवा में हल्की सैर और दौड़ भी लगा सकते है।

26. विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ का प्रयोग भी स्वाइन फ्लू के खतरे को कम करता है इसलिए हर रोज रसदार फल का सेवन करें। रोज-रोज एक ही फल लेने की बजाय आप संतरे,अवाले,कीवी,नींबू आदि के साथ-साथ आप सब्जियों में पालक और फूलगोभी का प्रयोग भी खाने में कर सकते है।

27. स्वाइन फ्लू एक सक्रमण बीमारी है इसलिए आप अपने साथ हमेशा मास्क अवश्य रखें। इसके अलावा किसी सार्वजनिक स्थान, सार्वजनिक परिवहन में जाने पर या किसी सार्वजनिक वस्तु को हाथ लगने के तुरंत बाद कभी भी अपनी नाक पर हाथ न फेरे और जितनी जल्द सम्भव हो सके अपने हाथ धो ले। सक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए आप आप थोड़ी-थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी और साबुन से हाथ धोते रहें।

28. उपरोक्त सभी उपायों के अलावा आप नीम और पुराने में समय में बनाई जाने वाले काली चाय जिसमे अदरक ,काली मिर्च आदि होती थी उसका सेवन भी दिन में एक बार कर सकते है।

29. आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी चिकित्सा के साथ-साथ स्वाइन फ्लू होने पर जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से सपर्क स्थापित करके अपना चेकअप करा ले और अगर रिपोर्ट पोजटिव आती है तो बिना देरी किये अस्पताल में भर्ती हो जाएँ।

30. काढ़ा पियें:- सर्दी, जुकाम, खांसी एवं flu में आयुर्वेद के काढ़े बहुत फायदेमंद हैं साथ ही स्वाइन flu से बचाव के लिए भी ये बहुत उपयोगी हैं| इसके लिए गिलोय का एक छोटा टुकड़ा, १-२ तुलसी पत्र, १-२ काली मिर्च, १ लॉन्ग, अदरक छोटा टुकड़ा, इन सब को कूटकर २ कप पानी में उबालें | 1 cup शेष रहने पर थोड़ा शहद डालकर पी लें। काढ़ा पीने के बाद 15-20 मिनट तक ठंडा पानी न पियें न ही ठंडी , खुली हवा में जाएँ | यदि व्यक्ति की तशीर गर्म है तो उपरोक्त द्रव्यों की मात्रा काम कर दें |

31. गर्भवती एवं प्रसूति महिलाएं जिनके बच्चे छोटे हो उन्हें न दे | यह काढ़ा 2-3 दिन तक सुबह शाम पी सकते हैं , साथ ही इसके जैसा गोजिह्वाड़ी क्वाथ या काढ़ा आता है | यह भी सर्दी , खांसी , flu में बहुत उपयोगी है |

32. गरम दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर पीना बहुत फायदेमंद है |

33. तुलसी , काली मिर्च , लौंग एवं अदरक की चाय भी सर्दी , खांसी , flu में बहुत फायदेमंद है |

34. आयुर्वेद की दवाएं:- आयुर्वेद की कुछ औषधियां सर्दी,  खांसी , जुकाम एवं फ्लू में बहुत फायदेमंद है किन्तु इन्हे चिकित्सक की राय से ही सेवन करें| जैसे:- लक्ष्मी विलास रस, सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण , अभ्रक भस्म, संजीवनी वटी आदि|

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