Category - वास्तुशास्त्र

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गृह प्रवेश और भूमि पूजन, शुभ मुहूर्त और विधिपूर्वक करने पर रहेंगे दोष मुक्त और लाभदायक

भवन सम्बन्धी कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माह का चयन करना अति महत्वपूर्ण होता है । भारतीय कैलेण्डर  के अनुसार फाल्गुन, वैसाख एवं सावन के महीने भूमिपूजन, शिलान्यास एवं गृह निर्माण ( Grah Nirman ) हेतु  के लिए सर्वश्रेष्ठ महीने माने गए हैं। इन महीनो में गृह सम्बन्धी किसी भी कार्य की शुरुआत करने से मान सम्मान, धन संपत्ति और निरोगिता की प्राप्ति होती है , घर के सदस्यों के मध्य प्रेम बना रहता है, जबकि माघ, ज्येष्ठ, भाद्रपद एवं मार्गशीर्ष महीने को......

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वास्तु अनुसार किचन होने से रहेंगे दीर्घायु और धन धान्य से भरपूर

Vastu Tips for Kitchen : हर भवन में रसोई घर का बहुत ही प्रमुख स्थान होता है । अगर रसोई घर वास्तु सम्मत है तो वहाँ पर बना भोजन खाकर उस घर के निवासी सदैव निरोगी रहेंगे लेकिन अगर वास्तु दोष है तो उस घर में रहने वालो को तरह तरह की बिमारियों, आपसी कलह और धन के आभाव का सामना करना पड़ सकता है । यहाँ पर रसोईघर के लिए बताये गए वास्तु के सिद्धांतों को अपनाकर आप निश्चय ही उत्तम लाभ प्राप्त कर सकते है । वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा  * वास्तु शास्त्र......

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आफिस व कार्यालय में सफलता और समृद्धि के लिए वास्तु के सरल उपाय

vastu upay for money in hindi | अचूक वास्तु उपाय से कारोबार में वृद्धि : आजकल कड़ी प्रतिस्पर्धा का जमाना है । लोग अपने व्यापार में आगे बढ़ने के लिए जी जान से प्रयास करते है। इनमें ना केवल उसके मालिक वरन तमाम कर्मचारियों का भविष्य भी दावँ में लगा होता है । किंतु कई बार बहुत परिश्रम के बाद भी बेशुमार धन लगाने के बाद भी सफलता कोसो दूर ही रहती है इसका एक प्रमुख कारण उनके कार्यलय के वास्तु दोष भी हो सकता है । वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा एक......

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वास्तु दोष निवारण के सरल घरेलु उपाय से करे सभी दोष दूर

वास्तु दोष निवारण के उपाय (Vastu Dosh Nivaran in Hindi) हर व्यक्ति की कामना होती है कि उसका एक सुंदर एवं वास्तु के अनुरूप घर हो जिसमें वह और उसका परिवार प्रेम, सुख शांति से जीवन जी सकें । लेकिन यदि उस भवन में कुछ वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो तो भवन के निवासियों को को परिवारिक, आर्थिक और सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। भवन के निर्माण के बाद उसे फिर से तोड़कर वास्तु दोषों को दूर करना बहुत ही कठिन होता है। इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने बिना किसी......

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वास्तु शास्त्र के अनुसार यहाँ हो आपका पूजा घर

कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो उसके भवन में पूजा कास्थान अवश्य ही होता है । हिदु धर्म में पूजा के लिए भवन में ईशान की दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है । चाहे भवन का मुख किसी भी दिशा में हो लेकिन पूजा घर यथासंभव ईशान कोण में बनाने से शुभ प्रभाव प्राप्त होते है। पूजा घर के लिए पूर्व और उत्तर की दिशा भी शुभ मानी जाती है । ध्यान रहे की पूजा घर इस तरह से बनाया जाये कि पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर ही रहे । प्राचीन......

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घर में खुशहाली के लिए गजब के वास्तु उपाय

उत्तर-पूर्व में रखें पानी का बहाव बाथरूम : – यह मकान के नैऋत्य-पश्चिम-दक्षिण कोण में एवं दिशा के मध्य अथवा नैऋत्य कोण व पश्चिम दिशा के मध्य में होना उत्तम है। वास्तु के अनुसार पानी का बहाव उत्तर-पूर्व में रखें। जिन घरों में बाथरूम में गीजर आदि की व्यवस्था है, उनके लिए यह और जरूरी है कि वे अपना बाथरूम आग्नेय कोण में ही रखें, क्योंकि गीजर का संबंध अग्नि से है। चूँकि बाथरूम व शौचालय का परस्पर संबंध है तथा दोनों पास-पास स्थित होते हैं। शौचालय......

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वास्तुशास्त्र और कार्यालय

किसी भी वास्तु खंड में सर्वश्रेष्ठ स्थिति दक्षिण दिशा की मानी गई है। वास्तु संबंघी किसी भी पुराने वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पश्चिम को प्रमुख स्थान नहीं दिया गया है। प्राचीन योजनाओं में दक्षिण-पश्चिम में शस्त्रागार के लिए स्थान बताया है। लगभग सभी शास्त्रों मे वास्तु खंड में दक्षिण दिशा तथा जन्मपत्रिका में दशम भाव (दक्षिण दिशा) को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है अत: स्वामी, मैनेजिंग डायरेक्टर, चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर या स्वमी की अनुपस्थिति में कार्यालय में......

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वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय

कभी-कभीदोषों का निवारण वास्तुशास्त्रीय ढंग से करना कठिन हो जाता है। ऐसे में  दिनचर्या के कुछ सामान्य नियमों का पालन करते हुए निम्नोक्त सरल उपाय कर इनका निवारण किया जा सकता है। पूजा घर पूर्व-उत्तर (ईशान कोण) में होना चाहिए तथा पूजा यथासंभव प्रातः06 से 08 बजे के बीच भूमि पर ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर ही करनी चाहिए। पूजा घर के पास उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में सदैव जल का एक कलश भरकर रखना चाहिए। इससे घर में सपन्नता आती है। मकान के......

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लक्ष्मी आगमन के विशेष वास्तु उपचार

वास्तु शास्त्र का आधार प्रकृति है। आकाश, अग्नि, जल, वायु एवं पृथ्वी इन पांच तत्वों को वास्तु-शास्त्र में पंचमहाभूत कहा गया है। शैनागम एवं अन्य दर्शन साहित्य में भी इन्हीं पंच तत्वों की प्रमुखता है। अरस्तु ने भी चार तत्वों की कल्पना की है। चीनी फेंगशुई में केवल दो तत्वों की प्रधानता है- वायु एवं जल की। वस्तुतः ये पंचतत्व सनातन हैं।ये मनुष्य ही नहीं बल्कि संपूर्ण चराचर जगत पर प्रभाव डालते हैं। वास्तु शास्त्र प्रकृति के साथ सामंजस्य एवं समरसता रखकर......

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बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष दूर करने के उपाय

एक सुंदर एवं दोषमुक्त घर हर व्यक्ति की कामना होती है। किंतु वास्तु विज्ञान के पर्याप्त ज्ञान के अभाव में भवन निर्माण में कुछ अशुभ तत्वों तथा वास्तु दोषों का समावेश हो जाता है। फलतः गृहस्वामी को विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। घर के निर्माण के बाद फिर से उसे तोड़कर दोषों को दूर करना कठिन होता है। ऐसे में हमारे ऋषि-मुनियों ने बिना तोड़-फोड़ किए इन दोषों को दूर करने के कुछ उपाय बताए हैं। उन्होंने प्रकृति की अनमोल......

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