योगासन

अनुलोम विलोम प्राणायाम : शरीर को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाने के लिए करे प्राणायाम

क्या है अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम –विलोम प्रणायाम (Anulom Vilom Pranayama) में सांस लेने व छोड़ने की विधि को बार-बार दोहराया जाता है। इस प्राणायाम को ‘नाड़ी शोधक प्राणायाम’  (Nadi Shodhak Pranayama) भी कहते है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम क्यों कहते है? 

नाड़ी = सूक्ष्म ऊर्जा चैनल; शोधन =सफाई, शुद्धि; प्राणायाम =साँस लेने की प्रक्रिया।

नाड़ियाँ मानव शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा चैनल है जो विभिन्न कारणों से बंद हो सकती है। नाड़ी शोधन प्राणायाम साँस लेने की एक ऐसी प्रक्रिया है जो इन ऊर्जा चैनलों को साफ करने में मदद करती है और इस प्रकार मन शांत होता है। इस प्रक्रिया को अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom) के रूप में भी जाना जाता है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं।

अनुलोम-विलोम को रोज करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं। वृद्धावस्था में अनुलोम-विलोम प्राणायाम योगा करने से गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें दूर होती हैं।

अनुलोम –विलोम प्रणायाम करने की विधि

दरी व कंबल स्वच्छ जगह पर बिछाकर उस पर अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं। फिर अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस अंदर की ओर भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें।

उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और सांस को बाहर निकालें। अब दायीं नासिका से ही सांस अंदर की ओर भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक और फिर धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें। 10 मिनट से अधिक समय तक इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस प्रणायाम को सुबह-सुबह खुली हवा में बैठकर करें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास करते समय इन चीज़ों का ख्याल रखें:

  • साँस पर जोर न दें और साँस की गति सरल और सहज रखें। मुँह से साँस नहीं लेना है या साँस लेते समय किसी भी प्रकार की ध्वनि ना निकाले।
  • उज्जयी साँस का उपयोग न करें।
  • उंगलियों को माथे और नाक पर बहुत हल्के से रखें। वहाँ किसी भी दबाव लागू करने की कोई जरूरत नहीं है।
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम के पश्चात् यदि आप सुस्त व थका हुआ महसूस करते हैं तो अपने साँस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान दे| साँस छोड़ने का समय साँस लेने से अधिक लंबा होना चाहिए|

अनुलोम –विलोम प्रणायाम करने के लाभ

1. इससे शरीर में वात, कफ, पित्त आदि के विकार दूर होते हैं।]

2. रोजाना अनुलोम-विलोम करने से फेफड़े शक्तिशाली बनतेहैं।

3. इससे नाडियां शुद्ध होती हैं जिससे शरीर स्वस्थ, कांतिमय एवं शक्तिशाली बनता है।

4. इस प्रणायाम को रोज करने से शरीर में कॉलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है।

5. अनुलोम-विलोम करने से सर्दी, जुकाम व दमा की शिकायतों में काफी आराम मिलता है।

6. अनुलोम-विलोम से हृदय को शक्ति मिलती है।

7. इस प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी सांस लेते हैं तो शुद्ध वायु हमारे खून के दूषित तत्वों को बाहर निकाल देती है। शुद्ध रक्त शरीर के सभी अंगों में जाकर उन्हें पोषण प्रदान करता है।

8. अनुलोम-विलोम प्राणायाम सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं और सुविधानुसार इसकी अवधि तय की जा सकती है।

अनुलोम –विलोम प्रणायाम करने की सावधानिया

कमजोर और एनीमिया से पीड़ित रोगियों को इस प्राणायाम के दौरान सांस भरने व छोड़ने में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।कुछ लोग समय की कमी के चलते जल्दी-जल्दी सांस भरने और निकालने लगते हैं। इससे वातावरण में फैला धूल, धुआं, जीवाणु और वायरस, सांस नली में पहुंचकर अनेक प्रकार के संक्रमण को पैदा कर सकते है। प्राणायाम के दौरान सांस की गति इतनी सहज होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय स्वयं को भी सांस की आवाज नहीं सुनायी देनी चाहिए।

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Niteen Mutha

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