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अनंत चतुर्दशी 2018 -जाने व्रत तिथि व पूजा मुहूर्त के साथ कथा माहात्म्य

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अनंत चतुर्दशी 2018 – Anant Chaturdarshi 2018

अनंत चतुर्दशी व्रत का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है, इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान (भगवान विष्णु) की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। ये कपास या रेशम से बने होते हैं और इनमें चौदह गाँठें होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत के कई राज्यों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान कई जगहों पर धार्मिक झांकियॉं निकाली जाती है।

अनंत चतुर्दशी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सारा साम्राज्य हार कर वनवास को चले गए थे तब भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। उसके बाद युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रोपदी के साथ पुरे विधि-विधान के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत किया था और अनंत सूत्र बाँधा था। अनंत चतुर्दशी का व्रत करने के प्रभाव से पांडव सब संकटों से मुक्त हो गए थे।

अनंत चतुर्दशी व्रत करने की विधि

अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का विधान है। यह पूजा दोपहर के समय की जाती है। इस व्रत की पूजन विधि इस प्रकार है-

  1. इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर कलश स्थापना करें।
  2. कलश पर अष्टदल कमल की तरह बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें या आप चाहें तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगा सकते हैं।
  3. इसके बाद एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें, इसमें चौदह गांठें लगी होनी चाहिए। इसे भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें।
  4. अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा शुरू करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें। पूजन के बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें।
  5. पुरुष अनंत सूत्र को दांये हाथ में और महिलाएं बांये हाथ में बांधे। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए और सपरिवार प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

अनंत सूत्र का मंत्र

   अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
   अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।

अनंत चतुर्दशी २०१८

2018 में अनंत चतुर्दशी कब है?

अनंत चतुर्दशी 2018 में, 23 सितंबर 2018 रविवार को है।

अनंत चतुर्दशी व्रत तिथि व पूजा मुहूर्त

व्रत तिथि – 23 सितंबर 2018

अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त – 06:14 (23 सितंबर 2018) से 07:17 (24 सितंबर 2018)

चतुर्दशी तिथि आरंभ – 05:43 (23 सितंबर 2018)

चतुर्दशी तिथि समाप्त -07:17 (24 सितंबर 2018)

अनंत चतुर्दशी व्रत के शास्त्रोक्त नियम

1. भगवान विष्णु के लिए किया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का व्रत भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इसके लिए चतुर्दशी तिथि सूर्य उदय के पश्चात दो मुहूर्त में व्याप्त होनी चाहिए।

2. अगर चतुर्दशी तिथि सूर्य उदय के बाद दो मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाए, तो अनंत चतुर्दशी एक दिन पहले मनाई जाती है। इस व्रत की पूजा और अन्य कार्य दिन के प्रथम भाग में करना शुभ होता हैं। अगर प्रथम भाग में पूजा करने से चूक जाते हैं, तो मध्याह्न के शुरुआती चरण में पूजा करनी चाहिए। मध्याह्न का शुरुआती चरण दिन के सप्तम से नवम मुहूर्त तक होता है।

अनंत चतुर्दशी का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। यह भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है। भारत के कई राज्यों में इस व्रत का प्रचलन है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती है।

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Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.

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