ओशो भजन

आनंद ही आनंद बरस रहा

आनंद ही आनंद बरस रहा (Anand hi Anand Baras rha bhajan in hindi Mp3)

आनंदहीआनंदबरसरहाबलिहारीऐसेसदगुरुकी।

धन-धन्यहमारेभागहुए, गुरुकेचरणोंकीखाकहुए;

ओशो में दरस हुए प्रभु के; बलिहारी ऐसे सदगुरु की।

क्या अनुपम रूप निराला है, साकी है या मधुशाला है;

भ्रम भव सागर से पार किया, बलि हारी ऐसे सदगुरु की।

क्या ध्यान की धारा बहा दिया, क्या प्रेम की बगिया लगा दिया;

खिल रहा खूब ओशो-उपवन, बलिहारी ऐसे सदगुरु की।

ओशो की यह अमृत धारा, क्या खूब बही ओशो धारा;

शब्दों में शून्य परोस दिया, बलिहारी ऐसे सद गुरु की।

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Pandit Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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