आध्यात्मिक गुरु

परम पूज्य श्री अवधूत बाबा शिवानंद जी

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अवधूत बाबा शिवानंद जी को बचपन से ही ईश्वर की प्राप्ति को लेकर एक जुनून-सा था। वह जब मात्र आठ साल के थे, एक महान हिमालयन योगी 108 जगन्नाथ स्वामी जी ने शिवानंद जी के तेज से प्रभावित होकर उन्हें अपने पास बुलाया, और गुरू-मंत्र देकर शीघ्रता से वहां से चले गये। इस दिव्य-मंत्र की प्राप्ति के बाद बाबा ने इसे बड़ी संख्या में आम लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने एक वर्कशॉप (कार्यशाला) शुरू किया। बाबा एक करिश्माई व्यक्ति थे। उन्हें भारतीय चिकित्सा का जनक भी माना जाता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन प्राणियों के कल्याण के लिए समर्पित किया है।

बाबा शिवानंद जी ने पूज्यनीय गुरु माँ एवं ईशान शिवानंद जी के साथ 11 महीने की अथक तपस्या व mantra से पारद (पारा) से एक शिवलिंग तैयार किया। इस अद्भुत और अलौकिक शिवलिंग के बारे में ऐसी मान्यता है कि स्वयं महादेव जी ने पारद संहिता के तीसरे अध्याय में कहा है कि करोड़ों शिवलिंग के पूजन से जो फल प्राप्त होता है, उससे भी करोड़ों गुना ज्यादा फल पारद शिवलिंग की पूजा और दर्शन से प्राप्त होता है। जीवन में भगवान शिव के महत्व और महिमा को आम लोगों तक पहुंचाने वाले बाबा शिवानंद जी का आश्रम लखनऊ में है।

बाबा शिवानंद कहते है कि बड़े बड़े आलीशान घरों में हर चीज का अलग अलग कमरा होता है। अतिथि का कमरा भी अलग होता है। लेकिन भगवान का कमरा होता ही नहीं है। रसोईघर में किसी आले में भगवान को रख देते हैं। लेकिन आप सब ऐसा नहीं करना। भगवान के लिए अलग से एक ऐसा कमरा बनाना जहां फर्नीचर नहीं हो। जमीन पर दरी व गद्दे रखे हों। कमरे में संभव हो सके तो कालीन रख देना। खंडित मूर्ति, टूटा दीया व फटे कैलेंडर घर में नहीं रखना।

बाबा ने भक्तों को आलमारी में मंदिर न बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जो चेतना तुम्हारे भीतर है वही परमात्मा के भीतर है। जैसा भाव रखोगे, वैसी ही कृपा मिलेगी। शिवलिंग परमब्रह्मा का सूचक है। समाज में एक बुद्धिहीन प्रचार हो चुका है कि घर में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। शिव की शरण में जो गया, उसका जीवन सफल हो जाएगा। परमात्मा की पूजा करो, गुरुओं ने भी शिवलिंग रूप की साधना की है। लेकिन टोने टोटके व ताबीज निकाल कर बाहर फेंक दो। शिवलिंग के आगे दीये जलाओगे, तो लक्ष्मी घर में वास करेगी। –

ब्रह्मांड एक नाद पर आधारित है। ब्रह्मांड में जीवन देने और लेने की शक्ति है। वैज्ञानिक भी गॉड पार्टिकल को मान चुके हैं, जबकि भारतीय संस्कृति इससे कहीं आगे है। नकारात्मक भाव या वाणी का असर ब्रह्मांड पर होता है। इसलिए जीवन में नफरत खत्म कर प्यार की जरूरत है। प्राकृतिक आपदा और परेशानियों का कारण नकारात्मकता ही है। शिवयोग से सफेद क्रांति, हरित क्रांति और प्राकृतिक आपदा पर नियंत्रण किया जा सकता है।

परमात्मा दाता हैं, हम सब भिखारी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वो देने के लिए हमारे पीछे पीछे भागते हैं। सत्संग तो कृपा पाने के लिए होता है, टाइम पास करने के लिए। परमात्मा जीवन प्रत्यक्ष कर देता है। दुर्गा सप्तशती शक्ति साधना का उच्चतम ग्रंथ है। चेतना जगाने का ग्रंथ है। कई जन्मों में जो कार्य किया है वो संचित होकर दुखों का कारण बन जाता है। दुखों से मुक्ति के लिए ही सप्तशती का पाठ किया जाता है।  दुर्गा सप्तशती के बीज मंत्रों से बाबा ने काफी असहाय लोगो ला भला किया है, बाबाजी के अनुसार –

शिव योग :

शिव का अर्थ है अनंत और योग अर्थात जुडऩे की प्रक्रिया है। शिवयोग भविष्य की जरूरत है। जर्मनी में कई लिपियों का अध्ययन और किसी भी विज्ञान से भारतीय संस्कृति को सीखना चाह रहे हैं। शिव योग हर व्यक्ति में है।नाद योग शक्ति है हर ग्रह का एक नाद है जिसे वैज्ञानिक अनुभव कर चुके हैं। यजुर्वेद में ऐसे मंत्रों का उल्लेख है लेकिन तपस्या से ही जागृत हो सकते हैं। मैं सप्त ऋषियों की शक्ति बांट रहा हूं। नकारात्मक भाव ब्रह्मांड को प्रभावित करते है।

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Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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