धर्म से रहित अर्थ व्यर्थ ही नहीं, हानिकारक भी है

अर्थ को नहीं, धर्म को प्रधानता मिले धन मनुष्य जीवन की एक आवश्यक वस्तु है, पर इतनी नहीं कि उसे प्रथम स्थान दिया जा सके। प्रथम स्थान धर्म का है, अर्थ का इसके बाद नम्बर आता है। धर्म से रहित अर्थ व्यर्थ ही नहीं, हानिकारक भी है। इसके विपरीत, अर्थरहित मनुष्य भी सुखी और तेजस्वी […]

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान चित्त अशुद्ध क्यों होता है ? जो हो चुका उसकी स्मृति और जो नहीं है उसके चिंतन से चित्त अशुद्ध होता है। बात जरा सूक्ष्म है। जो हो चुका वह प्रसंग, वह परिस्थिति, वह वस्तु अब उस रूप में नहीं रही। […]

जीवन और जगत्‌ को कर्मों की सुगंध से भरते चलो

हमारे कर्म हों भगवान के निमित्त यह बात सबको हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि परमेश्वर की पूजा अपने कर्म से करनी चाहिए। हमारा प्रत्येक कर्म भगवान के निमित्त हो। कर्म करने से पहले यह सोचो कि क्या यह कर्म भगवान को प्रसन्न करेगा ? किसी की निंदा अथवा हिंसा से परमात्मा खुश होंगे? हमारे […]

आखिर क्या है माला के 108 मनकों का कारण

माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं? माला जपने का क्या औचित्य है ? योग चूड़ामणि उपनिषद् में कहा गया है “षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्त्राण्येकं विंशति । एतत् संख्यान्तितं मंत्र जीवो जपति सर्वदा ॥” अर्थात् एक व्यक्ति दिन-रात के चौबीस घंटों में 21,600 बार श्वास लेता है। चौबीस घंटे में से बारह घंटे दिनचर्या में […]

दीपावली से जुड़ी कथाएं व मान्यताएं

दीपावली पर्व क्यों महत्वपूर्ण है ? ऋद्धि-सिद्धि, धन एवं वैभव की प्राप्ति के निमित्त दीपावली का त्योहार प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को हर्षोल्लास के साथ लक्ष्मीजी का पूजन करके मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्षों का वनवास पूरा करके और लंकेश्वर रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। फिर अयोध्या के […]

जानिए हिंदू धर्म में अन्न प्राशन संस्कार का महत्त्व

अन्न प्राशन संस्कार क्यों किया जाता है और इसका क्या महत्त्व है ? अन्नप्राशन संस्कार के बारे में कहा गया है .. अन्नाशनात्मातृगर्भे मलाशाद्यपि शुध्याति । अर्थात् माता के गर्भ में रहने पर शिशु में मलिन भोजन के शुद्धिकरण और शुद्ध भोजन कराने की प्रक्रिया ही अन्नप्राशन संस्कार कही जाती है। जब शिशु छ:-सात माह […]

नौ दिन ऐसे करें मां भगवती को प्रसन्न

कैसे सम्पन्न करें नवरात्र ? नवरात्र में अपने कुलाचार के अनुसार घट स्थापन, अखंड दीप प्रज्वलन एवं माला बंधन किया जाना चाहिए। खेत से मृत्तिका लाकर उसकी दो अंगुल चौड़ी चौकोर सतह बनाएं एवं उसमें सप्त धान्य बोएं। उसी तरह तांबे का कलश लेकर उसमें जल, गंध, फूल, अक्षत, सुपारी, पंचपल्लव, पंचरत्न तथा सिक्के डालें। […]

गंगा दशहरा और इसका पौराणिक महत्व

गंगा दशहरे पर स्नान क्यों? यह त्योहार ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की दशमी को गंगा के पवित्र जल में स्नान करके मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गंगा दशहरे के दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। कालसर्प योग से मुक्ति एवं मन के विकारों को शांत करने के लिए इस पावन त्योहार […]

जानिए हिंदू धर्म में नामकरण संस्कार का महत्त्व

हिंदू धर्म में नामकरण संस्कार के बारे में स्मृति संग्रह में क्या लिखा है आयुर्वर्चोऽभिवृद्धिश्च सिद्धिर्व्यवहृतेस्तथा । नामकर्मफलं त्वेतत् समुद्दिष्टं मनीषिभिः ॥ अर्थात् नामकरण संस्कार से आयु एवं तेज की वृद्धि होती है। नाम की प्रसिद्धि से व्यक्ति का लौकिक व्यवहार में एक अलग ही अस्तित्त्व उभरता है। पाराशर गृह्यसूत्र दशम्यामुत्थाप्य पिता नाम करोति । […]

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व

नवरात्र पूजन क्यों? ‘नवरात्र’ शब्द में ‘नव’ संख्यावाचक होने से नवरात्र के दिनों की संख्या नौ तक ही सीमित होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ देवताओं के 7 दिनों के तो कुछ देवताओं के 9 या 13 दिनों के नवरात्र हो सकते हैं। सामान्यतया कुलदेवता और इष्टदेवता का नवरात्र संपन्न करने का कुलाचार है। […]